9 अक्टूबर 2014

मानस-गीता-बाइबिल

दीपक ने हरपल दिया, छोटा एक बयान
कर्मों के आधार पर,  बना यहाँ  पहचान

इसी धरा पर हो चुके, तुलसी,कबिरा,सूर
सत्य, नीति, आदर्श के, दीपक हैं भरपूर

मानस, गीता, बाइबिल, या गुरुग्रंथ, कुरान
लाख दियों की रोशनी, भरा पड़ा सद्ज्ञान

स्वर्णकार की फूँकनी, भभका लेकर साथ
डली गलाती है तभी, स्वर्ण झुकाता माथ

बुरा आचरण दूर हो, सदाचरण हो पास
ऐसा कर्मठ आदमी, करता स्वयं उजास

मिलकर कोई काम हो, हो कोई बदलाव
वही दीप है प्यार का, राष्ट्र प्रेम का भाव

आपस की खाई पटे, बना रहे विश्वास
ऐसे समरस दीप का, करिये आप प्रयास

प्रेम, शान्ति, सद्भावना, अनुशासन, सद्ज्ञान
इन्हीं गुणों से दीप-सम, बने यहाँ पहचान

दीप-दान से है बड़ा, आँखों का ही दान
शुरू करो संसार में, यही महा अभियान

मिले प्रेरणा कार्य की, उन्नत बने समाज
समतामूलक दीप की, बहुत ज़रुरत आज

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