अँधियारा घिरने लगा, हुई सुनहरी शाम
प्रहरी बनकर दीप ने, लड़ा महा संग्राम
शरणागत उजियार है, अँधियारे का राज
पीतल को सोना कहे, नया ज़माना आज
लोकतंत्र के दीप का, बहुत बुरा है हाल
चलो थाम लें सत्य की, जलती हुई मशाल
देख दीप की रोशनी, चंदा हुआ निराश
अम्बर से लेकर गया, आकस्मिक अवकाश
धरती पर दीपक जले, अम्बर में गुणगान
वर्षा करते पुष्प की, गदगद कृपानिधान
दूर क्षितिज पर रोशनी, जग को दे संकेत
समय पखेरू उड़ रहा, चेत सके तो चेत
चाँद गया, तारे गये, गई चाँदनी साथ
दुनिया की ये रीत है, समय जुड़ाये हाथ
जगमग होती रोशनी, झिलमिल करते पात
जैसे भू पर नाचती, तारों की बारात
मन की आँखें दीप सम, होतीं जिनके पास
सफल उन्हीं के हो रहे, जग में सभी प्रयास
गगन झारता नेह को, करता है मनुहार
दीपशिखा झिलमिल करे, धरती का श्रंगार
प्रहरी बनकर दीप ने, लड़ा महा संग्राम
शरणागत उजियार है, अँधियारे का राज
पीतल को सोना कहे, नया ज़माना आज
लोकतंत्र के दीप का, बहुत बुरा है हाल
चलो थाम लें सत्य की, जलती हुई मशाल
देख दीप की रोशनी, चंदा हुआ निराश
अम्बर से लेकर गया, आकस्मिक अवकाश
धरती पर दीपक जले, अम्बर में गुणगान
वर्षा करते पुष्प की, गदगद कृपानिधान
दूर क्षितिज पर रोशनी, जग को दे संकेत
समय पखेरू उड़ रहा, चेत सके तो चेत
चाँद गया, तारे गये, गई चाँदनी साथ
दुनिया की ये रीत है, समय जुड़ाये हाथ
जगमग होती रोशनी, झिलमिल करते पात
जैसे भू पर नाचती, तारों की बारात
मन की आँखें दीप सम, होतीं जिनके पास
सफल उन्हीं के हो रहे, जग में सभी प्रयास
गगन झारता नेह को, करता है मनुहार
दीपशिखा झिलमिल करे, धरती का श्रंगार
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें