15 अक्टूबर 2012

दीप कहानीकार है

दीप कहानीकार है, सूर्य कथा- सम्राट
लेकिन देखो रात में , हैं दीपक के ठाट

दीप प्रवाहित कर रही, गोरी नदिया तीर
मन में है ये  कामना, चमकेगी  तकदीर

अम्बर में उजियार है, धरती पर अँधियार
दीपक ने इस तथ्य को, झुठलाया हरबार

हिंसा-हत्या से बँधी, रजनी की तकदीर
समरसता के दीप हैं, गाँधी और कबीर

रात उदासी, नींद है, दिन जीवन,उल्लास
भरा दीप ने रात भर, सुख-वैभव,विश्वास

अगर बुझा है दीप तो, अँधियारा चहुँओर
रजनी की मंशा यही, दीप न देखे भोर

थरथर काँपे दीपिका, खुद का करे बचाव
हवा निगोड़ी कर रही, आतंकी बरताव

बूढी़ माँ दीपक धरे, लेकर मन में आस
तुलसी चौरे से कभी, अंतस होय उजास

दिया उजाला आँख को, पत्थर को दी आग
वितरित करता दीप यों, अंतस का अनुराग

दीप दिवाली पर सजे, होली रंग-बिरंग
दोनों में उल्लास है,  उर्जा,  हर्ष,  उमंग

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