भाई यदि है साथ तो,मत कर सोच-विचार।
काटे से कटता नहीं , पानी का आकार॥
भाई भुजा सामान है, पत्नी दिल का चैन।
किस्मत वालों को मिली , हर युग में ये देन॥
भाभी माँ का रूप है , भाई पिता समान।
आखें अपनी खो रही , इस युग की संतान॥
भाई का कोई नहीं , बाकी रहा निशान।
हर नुकते से हो गई, दुश्मन की पहचान॥
घर तब गुमसुम हो गया, आँगन विकल- उदास।
भाई ने छल - छिद्र कर , बाँध रखा विश्वास॥
घर- आँगन सामान सब, बँटे खेत- खलिहान।
ईश - कृपा से बच रहा , आपस में सम्मान॥
भाई के आदर्श हैं , भरतं, लखन - श्रीराम।
थे सुग्रीव ,विभीषण भी, जग में हैं बदनाम॥
छोटी-सी इक बात पर, वह भी थी निर्मूल।
भाई- भाई में तने , आपस में तिरशूल॥
भाई ने जब कर दिए , हस्ताक्षर चुपचाप।
बाँध तोड़ आँखें बहीं, ख़ुद ही अपने आप॥
दुनिया में दूजी नहीं , ऐसी कहीं नजीर।
चरणपादुका को मिले, सिंहासन जागीर॥
27 मार्च 2009
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