25 मार्च 2009

ऊँचाई आकाश की

भरा हुआ उत्साह से, होता नहीं निराश।
दृढ़ इच्छा के सामने, झुकता है आकाश॥

आशावादी के लिए, सुबह नहीं , ना शाम।
हर दिन अनुपम है उसे, करता जाए काम

लिखे- लिखाये वरक पर, नज़र नहीं जम पाय।
कोरे काग़ज पर कलम, रखते ही ललचाय॥

तृप्त हुए हम देखकर, यह स्वागत- सत्कार।
मन करता इस द्वार पर, आयें बारम्बार॥

बरसों तक बनता रहा, अपना एक मकान।
सपनों में मिलता रहा, मुझे क़र्ज औ' दान॥

ऊँचाई आकाश की , छूना है आसान।
प्रबल इरादों के लिए, नहीं कहीं व्यवधान॥

सद्इच्छा इस दास की, पूरी कर दे नाथ।
तू नाथों का नाथ है, मै हूँ दीन अनाथ॥

पत्थर में तो कर दिया, प्राणों का संचार।
देखें क्या रंग लायगा, अपना यह व्यवहार॥

हर मुश्किल के सामने , झुके नहीं इकबार।
हिम्मत ही करती रही , हमको गंगा पार॥

मुश्किल तो कुछ भी नहीं, हर मंजिल है पास।
सम्भव है सबकुछ अगर, हो मन में विश्वास॥






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