पूजन कर गोरी उठी, ले दीपों की थाल
जगमग जगमग रोशनी, खुशियाँ हुईं निहाल
हवा थपेड़े मारती, आँधी - झंझावात
दीपक ने सबकुछ सहा, तब बीती है रात
इधर-उधर छुपती फिरे, लज्जित,मूक,उदास
दिन भर काटे कालिमा, अपना कारावास
दुख की चिंता त्याग दो, दुखियारा संसार
दीप स्वयं ढ़ोता यहाँ, पांवों में अँधियार
आँगन-आँगन दीप हैं, गली-गली उजियार
ऐसे में मावस भला, जाए तो किस द्वार
आधा बूढ़ा हो गया, अपना ये जनतंत्र
भ्रष्ट आचरण ही फला अँधियारे का मंत्र
महलों में उजियार है, कुटिया में अँधियार
चलो रोशनी बाँट दें, सबका है अधिकार
सिंहासन शोभित हुए, अँधियारे का राज
फिर चुनाव में रोशनी, खोजे लोकसमाज
भूखे को रोटी मिले, बहुत बड़ी सौगात
घोर अँधेरी रात में, जैसे होय प्रभात
धरती का भूगोल है, दीपक का इतिहास
दोनों खुशियाँ बाँटते, उर्जा और उजास 30
जगमग जगमग रोशनी, खुशियाँ हुईं निहाल
हवा थपेड़े मारती, आँधी - झंझावात
दीपक ने सबकुछ सहा, तब बीती है रात
इधर-उधर छुपती फिरे, लज्जित,मूक,उदास
दिन भर काटे कालिमा, अपना कारावास
दुख की चिंता त्याग दो, दुखियारा संसार
दीप स्वयं ढ़ोता यहाँ, पांवों में अँधियार
आँगन-आँगन दीप हैं, गली-गली उजियार
ऐसे में मावस भला, जाए तो किस द्वार
आधा बूढ़ा हो गया, अपना ये जनतंत्र
भ्रष्ट आचरण ही फला अँधियारे का मंत्र
महलों में उजियार है, कुटिया में अँधियार
चलो रोशनी बाँट दें, सबका है अधिकार
सिंहासन शोभित हुए, अँधियारे का राज
फिर चुनाव में रोशनी, खोजे लोकसमाज
भूखे को रोटी मिले, बहुत बड़ी सौगात
घोर अँधेरी रात में, जैसे होय प्रभात
धरती का भूगोल है, दीपक का इतिहास
दोनों खुशियाँ बाँटते, उर्जा और उजास 30
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